Quotes/Thoughts

प्रकृति का बुलावा (Nature’s Call)

घड़ी में टक टक हुए जा रही थी धड़कन मेरी तेज़ हुए जा रही थी न जाने क्यों मन में हलचल हो रही थी कि आज तो कुछ काण्ड होए! रास्ता कोई भी न नज़र आ रहा था बेबसी का मानो समा छा रहा था मंद मंद मेरा दिल भी अब घबरा रहा था कि… Continue reading प्रकृति का बुलावा (Nature’s Call)